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    समाज सुधारक, सामाजिक न्याय के चैंपियन महात्मा ज्योतिबा फुले

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    महात्मा ज्योतिबा गोविंदराव फुले शिक्षा और सामाजिक सुधार के माध्यम से दलितोत्थान के लिए हमेशा हमारे दिलों में रहेंगे! बहुत ही कठिन परिस्थितियों में जब उन्होंने अपनी पत्नी सावित्रीबाई फुले की मदद से समाज के कमजोर वर्गों, विशेष रूप से महिलाओं को शिक्षा प्रदान करके उन्हें सशक्त बनाने का बीड़ा उठाया। सभी बाधाओं, चुनौतियों और कठिनाइयों का सामना करते हुए, वे एससी, एसटी, ओबीसी और हाशिए पर रहे अन्य वर्गों के साथ हो रहे क्रूर अन्याय के खिलाफ मजबूती से खड़े हुए।
    एक विशाल व्यक्तित्व, महात्मा फुले ने सामाजिक न्याय, समानता और महिला सशक्तिकरण के लिए शिक्षा रूपी सबसे शक्तिशाली उपकरण को इस्तेमाल किया और गरीब, वंचित, पिछड़े व दलितों की आशा की किरण बने। इन वर्गों के लोगों को उस समय उनकी जाति के आधार पर प्रताड़ित किया जा रहा था। निःस्वार्थ तरीके से दलितों की सेवा और उत्थान करने की उनकी प्रतिबद्धता लोगों को इतनी प्रेरक लगी कि लोगों ने उन्हें महात्मा के रूप में प्रतिष्ठित किया!
    दलित अत्याचारों के खिलाफ खड़े होने के लिए महात्मा फुले का दृढ़ संकल्प मुझे बहुत प्रेरित करता है। 19वीं शताब्दी हमारे इतिहास में एक कठिन समय था। यह वह समय भी था जब सामाजिक मंथन चल रहा था। 11 अप्रैल, 1827 को महाराष्ट्र के सतारा में माली जाति के एक साधारण परिवार में जन्मे ज्योतिबा फुले जाति-आधारित भेदभाव की व्यापक बुराइयों से परेशान थे। उनके पिता गोविंदराव पुणे में सब्जी विक्रेता थे। थॉमस पेन की पुस्तक ‘द राइट्स ऑफ मैन‘ से प्रभावित, महात्मा फुले का मानना था कि सामाजिक बुराइयों से मुकाबला करने का एकमात्र समाधान महिलाओं और निचली जातियों के सदस्यों को शिक्षा के प्रति जागृत करना है।
    उन्होंने समाज में जाति-आधारित वर्चस्व के विचार का पुरजोर विरोध किया। किसानों और अन्य निम्न जाति के लोगों के अधिकारों के लिए संघर्ष किया। जैसा कि कहा जाता है दान घर से शुरू होता है, उन्होंने सबसे पहले अपनी पत्नी सावित्रीबाई फुले को शिक्षित किया। 1848 में पुणे में तात्यासाहेब भिडे के निवास पर लड़कियों के लिए पहला स्कूल शुरू किया। सावित्रीबाई फुले को हमारे देश की पहली महिला शिक्षिका माना जाता है। यह एक नई सुबह थी, जिसने अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के बीच एक नई तरह की आशा और ऊर्जा का संचार किया।
    महात्मा फुले के जीवन से हमारे लिए कई सीख हैं, जो आज भी प्रासंगिक हैं क्योंकि हम सामूहिक रूप से एक नए भारत का निर्माण करने का प्रयास कर रहे हैं जो लचीला, समावेशी और आत्मनिर्भर भारत हो। महात्मा फुले ने सामाजिक समानता, महिला सशक्तिकरण और एससी, एसटी और ओबीसी के लिए शिक्षा को बढ़ावा देने हेतू अथक प्रयास किए। महात्मा फुले का दृष्टिकोण संयुक्त राष्ट्र के सत्त विकास लक्ष्यों (SDGs) में भी पर्याप्त रूप से परिलक्षित होता है, जो गरीबी, भुखमरी को समाप्त करने, अच्छे स्वास्थ्य और कल्याण को सुनिश्चित करने, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और लैंगिक समानता के वैश्विक संकल्प में बहुत स्पष्ट रूप से व्यक्त किए गए हैं।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत आज महात्मा फुले और उनकी पत्नी सावित्रीबाई फुले द्वारा परिकल्पित सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास के मार्ग पर चल रहा है। आवास और शहरी मामलों मंत्रालय द्वारा स्थायी आधार पर शहरी गरीब परिवारों की गरीबी को कम करने के लिए दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन (डीएवाई-एनयूएलएम) लागु की गई है। 2014-15 से जून, 2022 तक, 12 लाख से अधिक शहरी गरीबों को उनकी रोजगार क्षमता बढ़ाने के लिए कौशल प्रशिक्षण दिया गया है।
    इसी तरह से दीनदयाल अंत्योदय योजना – राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (डीएवाई – एनआरएलएम) सक्रिय रूप से ग्रामीण गरीब महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) में संगठित कर रही है और उन्हें गरीबी से बाहर निकालने में मदद कर रही है। जून, 2022 तक, लगभग 8.39 करोड़ ग्रामीण गरीब महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों में शामिल किया गया है। इच्छुक एससी, एसटी और महिला उद्यमियों को स्टैंड-अप इंडिया योजना के तहत 1,33,995 से अधिक खातों में 30 हजार करोड़ रुपये से अधिक का ऋण स्वीकृत किया गया है।
    हमें यह ध्यान देने की आवश्यकता है कि नए भारत के निर्माण के लिए सकारात्मक और कल्याणकारी कार्यक्रमों और योजनाओं का पूर्ण रूप से क्रियान्वयन हो। उदाहरण के लिए, एससी, ओबीसी, ईबीसी और एसटी के लिए जो आरक्षण का प्रावधान है। इसे पूरे देश में समग्र रूप से लागू किया जाना चाहिए। इसी तरह, स्कूल छोड़ने वाले बच्चों को रोकने के लिए हर संभव प्रयास किया जाना चाहिए, क्योंकि उनमें से अधिकांश समाज के दलित वर्गों से होते हैं। यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इंफॉर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन प्लस (यूडीआईएसई$) के अनुसार, प्राथमिक छात्रों के बीच ड्रॉपआउट दर 2020-21 में 0.8 प्रतिशत से बढ़कर 2021-22 में 1.45 प्रतिशत हो गई। माध्यमिक स्तर (कक्षा IX से X) पर ड्रॉपआउट 14.6 प्रतिशत था। हालांकि 2019-20 में सुधार हुआ है, लेकिन लाखों छात्र आगे अपनी शिक्षा जारी नहीं रख पाए हैं। परिणामस्वरूप, उच्च शिक्षा में हमारा सकल नामांकन अनुपात 30 प्रतिशत से कम बना हुआ है।
    यह वास्तव में खुशी की बात है कि कई राज्यों ने प्राथमिक और उच्चतर माध्यमिक स्तरों पर ड्रॉपआउट को रोकने के लिए कई उपाय शुरू किए हैं। उदाहरण के लिए, हरियाणा सरकार ने स्कूल से बाहर पाए गए छात्रों को मुख्य धारा में लाने की प्रक्रिया शुरू की है। हमें अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के छात्रों को भी विशेष कौशल से लैस करने के लिए बहु-आयामी रणनीति अपनानी चाहिए ताकि उनकी आय में वृद्धि हो। अमीरों के और अमीर होने से ज्यादा जरूरी है गरीबों को अमीर बनाना। दलितों के बीच महिलाओं और अत्यंत पिछड़े समुदायों (ईबीसी) के समग्र सशक्तिकरण पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। शिक्षा के बावजूद उनके खिलाफ अत्याचार एक गंभीर मुद्दा है। सामाजिक असमानताओं का नया सेट तैयार हो गया है। महिलाओं को संसद और राज्य विधानसभाओं में भी अपना हिस्सा मिलना चाहिए।
    गरीब बच्चों में कुपोषण की व्यापकता को देखते हुए उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ-साथ पौष्टिक आहार उपलब्ध कराया जाए। उनके लिए ज्यादा मॉडल स्कूल बनाने की आवश्यकता है। सरकारें गरीबों को सशक्त बनाने के लिए एक सराहनीय काम कर रही हैं, लेकिन कारपोरेट जगत, सामाजिक व गैर सरकारी संगठनों को भी आगे आना चाहिए। दलितों के लिए शुरू से कल्याणकारी योजनाओं को पूरी पारदर्शिता से लागु करने की जरूरत है ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों को लाभ मिले, तभी सामाजिक समानता और न्याय का सपना साकार होगा।
    महात्मा ज्योतिबा फुले – जिन्होंने गुलामगिरी (गुलामी) और शेतकर्याचा आसुद (The Whipcard of the Cultivators) जैसे अपने लेखन में अपने विचारों को शानदार ढंग से व्यक्त किया। आप 28 नवंबर, 1890 को अपने स्वर्गीय निवास के लिए चले गए, उनके आदर्श और जीवन की दृष्टि हमेशा के लिए प्रासंगिक रहेगी।
    महात्मा ज्योतिबा फुले के अग्रणी प्रयासों ने एक समावेशी, सहिष्णु और दयालु भारत की नींव रखी। आइए हम आजादी के अमृत काल में भारत को महात्मा ज्योतिबा फुले के सपनों का एक समावेशी और जीवंत भारत बनाने का संकल्प लें।  

    • Author : श्री बंडारू दत्तात्रेय राज्यपाल, हरियाणा
    • Subject : समाज सुधारक, सामाजिक न्याय के चैंपियन महात्मा ज्योतिबा फुले
    • Language : Hindi
    • Year : 2022