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    ब्लॉग

    GOVERNOR

    जब मैं इमरजेंसी में जेल गया तो मेरी मां मेरे...

    25 जून, 1975 को मध्यरात्रि की घड़ी से कुछ ही मिनट पहले तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा देश के लिए आंतरिक व बाहरी खतरे को बहाने से आंतरिक आपातकाल की घोषणा की गई थी। यह भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का सबसे काला दिन था। सभी शीर्ष राष्ट्रीय नेताओं – जयप्रकाश नारायण, मोरारजी देसाई, अटल बिहार वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी, जॉर्ज फर्नांडीस और कई अन्य को गिरफ्तार कर लिया गया। प्रेस का गला घोंट दिया गया। कोई लोकतांत्रिक अधिकार नहीं थे। आपातकाल का विरोध करने वालों के खिलाफ पुलिस ने बर्बरता की। आरएसएस पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया था। एक युवा आरएसएस प्रचारक के रूप में, मैं जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में ‘‘लोक संघर्ष समिति‘‘ के बैनर तले लोगों को आपातकाल के खिलाफ लामबंद करने में सक्रिय रूप से भाग ले रहा था। जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में यह वास्तव में भारत का दूसरा स्वतंत्रता संग्राम था। गिरफ्तारी से बचने के लिए मैं न केवल भूमिगत था बल्कि अलग-अलग हेयर स्टाइल के साथ अपनी पोशाक यानि पेंट और शर्ट में भी…

    GOVERNOR

    बाल श्रम निषेध दिवस – बाल विकास से ही राष्ट्र...

    बच्चे किसी भी राष्ट्र के भावी निर्माता होते हैं। इस भावी पीढ़ी के सर्वागींण विकास की जिम्मेवारी राष्ट्र के साथ-साथ हम सब की है। बच्चों को बाल श्रम जैसे शिकंजे से उन्मुक्त कर शिक्षा के अवसर उपलब्ध करवाने से ही इनका भविष्य उज्जवल हो सकता है। दुनिया भर में बाल श्रम की बुराई व्यापक रूप से घर कर चुकी है। इसके पीछे, गरीबी निरक्षरता, कानून में ढील व सामाजिक-आर्थिक और राजनीतिक कारण हैं। केवल सुदृढ़ आर्थिक स्थिति से ही विश्व का कोई भी देश बाल श्रम की समस्या को समाप्त करने में सफल नहीं हो सकता। बाल श्रम की बुराई को सामाजिक दृष्टिकोण और राजनीतिक संवेदनशीलता से ही दूर किया जा सकता है। विकसित देशों ने बाल श्रम की समस्या का समाधान आर्थिक रूप से सुदृढ़ होने से बहुत पहले ही कर दिया था। विगत् आठ वर्षों में, भारत बाल श्रम रोकने में काफी हद तक सफल रहा है। इस दिशा में बाल श्रम (निषेध और विनियमन) संशोधन अधिनियम -2016 एक मील का पत्थर साबित हुआ है। जब मैं केंद्रीय…

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    बाल श्रम निषेध दिवस – बाल विकास से ही राष्ट्र...

    बच्चे किसी भी राष्ट्र के भावी निर्माता होते हैं। इस भावी पीढ़ी के सर्वागींण विकास की जिम्मेवारी राष्ट्र के साथ-साथ हम सब की है। बच्चों को बाल श्रम जैसे शिकंजे से उन्मुक्त कर शिक्षा के अवसर उपलब्ध करवाने से ही इनका भविष्य उज्जवल हो सकता है। दुनिया भर में बाल श्रम की बुराई व्यापक रूप से घर कर चुकी है। इसके पीछे, गरीबी निरक्षरता, कानून में ढील व सामाजिक-आर्थिक और राजनीतिक कारण हैं। केवल सुदृढ़ आर्थिक स्थिति से ही विश्व का कोई भी देश बाल श्रम की समस्या को समाप्त करने में सफल नहीं हो सकता। बाल श्रम की बुराई को सामाजिक दृष्टिकोण और राजनीतिक संवेदनशीलता से ही दूर किया जा सकता है। विकसित देशों ने बाल श्रम की समस्या का समाधान आर्थिक रूप से सुदृढ़ होने से बहुत पहले ही कर दिया था। विगत् आठ वर्षों में, भारत बाल श्रम रोकने में काफी हद तक सफल रहा है। इस दिशा में बाल श्रम (निषेध और विनियमन) संशोधन अधिनियम -2016 एक मील का पत्थर साबित हुआ है। जब मैं केंद्रीय…

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    विश्व पर्यावरण दिवस : सुनहरे व सुरक्षित भविष्य के लिए...

    मनुष्य समय रहते नहीं चेता तो प्रकृति एवं पर्यावरण संरक्षण में देरी मानवता के सुरक्षित भविष्य के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकती है। आदिकाल से ही पर्यावरण व मानव स्वास्थ्य का गहरा सम्बन्ध रहा है। पिछले कुछ दशकों में, भौतिक विकास में अचानक तेजी आई है, जो हमारे पर्यावरणीय स्वास्थ्य के लिए अनुकूल नहीं हैं। पर्यावरण की गुणवत्ता में गिरावट का होना पृथ्वी के लिए गंभीर खतरा है। आज मानव जीवन पृथ्वी पर ही सम्भव है। इसलिए हमें धरती मां को बचाने के लिए ठोस प्रयास करने होंगे। इसी उद्देश्य से विश्व पर्यावरण दिवस -2022 मनाने के लिए पर्यावरण बचाओ अभियान का नारा ‘‘केवल एक पृथ्वी’’ दिया गया है। प्रकृति व पर्यावरण के संरक्षण से ही प्राकृतिक आपदाओं से बचा जा सकता है। प्रकृति व पर्यावरण के साथ खिलवाड़ करना प्राणी मात्र के जीवन में अप्रत्याशित विपत्तियों को आमंत्रित करना है। दशकों से हमने दुनिया भर में प्राकृतिक आपदाओं के कारण होने वाली भारी तबाही को बखुबी झेला है। राष्ट्र संघ के ऑफिस फॉर डिजास्टर रिस्क रिडक्शन द्वारा हाल…

    Hon'ble Governor

    आराष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस पर विशेष

    आज के युग में कोई भी देश प्रौद्योगिकी व नई तकनीक के बलबुते ही दुनिया में कृषि, सामरिक, आर्थिक व शिक्षा के क्षेत्र में विकास कर सकता है। वर्तमान में भारत हर क्षेत्र में प्रौद्योगिकी व तकनीकी के नए मोड को अपनाते हुए तेजी से आगे बढ़ रहा है। राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस, जिसे हम हर साल 11 मई को मनाते हैं, यह दिन हमें वैश्विक चुनौतियों का सामना करने के लिए तकनीकी रूप से सशक्त होने के हमारे सामूहिक, और कर्तव्यों व जिम्मेदारियों की याद दिलाता है। इस दिन महान वैज्ञानिक एवं पूर्व राष्ट्रपति ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के नेतृत्व में भारत ने राजस्थान के पोखरण में ‘‘ऑपरेशन शक्ति’’ के तहत सफलतापूर्वक तीन परमाणु परीक्षण करके परमाणु हथियारों वाले देशों के समूह में शामिल होने में सफलता पाई। यह विज्ञान और प्रौद्योगिकी और सामरिकी के क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत बनने के प्रयासों में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ। आज भारत हर क्षेत्र में तकनीकी प्रगति का लाभ उठाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहा है। स्वास्थ्य से लेकर शिक्षा तक, रक्षा…