वेश और भाषा करते हैं देश की संस्कृति को प्रतिबिंबित- कप्तान सिंह सोलंकी 09.04.2018

April 10, 2018
 
 
अम्बाला, 9 अप्रैल -हरियाणा के राज्यपाल प्रो0 कप्तान सिंह सोलंकी ने आज जीएमएन कालेज अम्बाला छावनी के दीक्षांत समारोह में 426 विद्यार्थियों को स्नातक और स्नातकोत्तर की डिग्रीयां प्रदान की। डिग्रीयां हासिल करने वालों में कला संकाय के 48, विज्ञान संकाय के 99, कॉमर्स के 140, बीबीए संकाय के 13, एमए अंग्रेजी और राजनीतिक शास्त्र के 34 स्नातकोत्तर और एम कॉम के 92 विद्यार्थी शामिल हैं। 
उपस्थित विद्यार्थियों को उज्जवल भविष्य की शुभकामनाएं देते हुए राज्यपाल ने कहा कि केवल किताबी शिक्षा हासिल करना ही पर्याप्त नहीं है बल्कि जीवन में आस्था, अनुशासन, आत्मियता और अध्यात्मिकता जैसी गुण धारण करके ही देश के प्रति जिम्मेवारी का सही निर्वहन संभव है। उन्होने कहा कि देश के भविष्य का आकंलन खेत, खलियान और उद्योगों ने नहीं बल्कि स्कूल और कालेज के कक्षा रूम में दी जा रही शिक्षा के स्तर और प्रारूप पर निर्भर करता है। उन्होने कहा कि देश में केवल 11 प्रतिशत ही ऐसे युवा है जिन्हें स्कूल और विश्वविद्यालय स्तर की शिक्षा हासिल करने का अवसर प्राप्त होता है। उन्होने कहा कि अन्य देशवासियो की तुलना में देश के नवनिर्माण और समाज के नैतिक उत्थान के प्रति इस वर्ग की जिम्मेवारी बहुत अधिक है। 
उन्होने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बेटी बचाओ-बेटी पढाओ अभियान का शुभारम्भ हरियाणा की धरती पानीपत से किया था और इस समय प्रदेश की बेटियां शिक्षा, खेल, अंतरिक्ष, फिल्म उद्योग सहित सभी क्षेत्रों में अग्रणी भूमिका अदा कर रही हैं। उन्होने स्वच्छ राजनीति और नैतिकता के क्षेत्र में स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि उन्होने छात्र जीवन में पाश्चात्य संस्कृति से प्रेरित दीक्षांत समारोह में धारण की जाने वाली वेशभूषा का विरोध किया था और आज उसी का परिणाम है कि हरियाणा में 95 प्रतिशत शिक्षण संस्थानों में भारतीय संस्कृति और पारम्परिक वेशभूषा में दीक्षांत समारोह आयोजित किये जा रहे हैं। उन्होने शिक्षा के क्षेत्र में जीएमएन कालेज के प्रयासों की सराहना की और कहा कि 70 वर्ष के अपने लंबे कार्यकाल में इस महाविद्यालय ने शिक्षा के साथ-साथ खेल और सांस्कृतिक गतिविधियों में विश्वविद्यालय और प्रदेश स्तर पर अपनी महत्वपूर्ण पहचान स्थापित की है। उन्होने महाविद्यालय द्वारा भारतीय वेशभूषा में दीक्षांत समारोह आयोजित करने के प्रयासों की भी सराहना की। 
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए स्वास्थ्य, खेल एवं युवा कार्यक्रम मंत्री अनिल विज ने कहा कि हरियाणा में ही सरस्वती नदी के किनारे वेदों और उपनिष्दों की रचना के माध्यम से देश और समाज को शिक्षा ज्ञान प्रदान हुआ है। इसके अलावा अध्यात्मिक ज्ञान की शुरूआत भी हरियाणा के कुरूक्षेत्र नामक स्थान पर महाभारत के युद्ध में भगवान कृष्ण द्वारा अर्जुन को दिये गये उपदेश के माध्यम से हुई थी। उन्होने विद्यार्थियों को अपनी संस्कृति और नैतिक मूल्यों से जुडने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि अपने छात्र जीवन में उन्होने दीक्षांत समारोह में शामिल होने से इसलिए मना किया था क्योंकि दीक्षांत समारोह में अंग्रेजो के समय से चली आ रही वेशभूषा को पहनाया जाता था। शिक्षा के क्षेत्र में हरियाणा सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों का जिक्र करते हुए उन्होने कहा कि हरियाणा देश का पहला ऐसा राज्य है जहां हर 20 किलोमीटर के बाद महिला शिक्षा के लिए राजकीय संस्थान स्थापित करने का प्रयास किया जा रहा है। गत वर्ष इस तरह के 20 संस्थान स्थापित किए गये थे और इस वर्ष 29 अन्य महाविद्यालयों की स्थापना का कार्यक्रम है। उन्होने कहा कि रोजगारप्रद्ध शिक्षा प्रदान करना समय की सबसे बडी मांग है और हरियाणा में देश का पहला कौशल विकास विश्वविद्यालय स्थापित किया जा रहा है। इसके अलावा देश की प्राचीन भाषा संस्कृत के संरक्षण और प्रचार-प्रसार के लिए संस्कृत विश्वविद्यालय स्थापित किया जा रहा है और प्राचीन चिकित्सा पद्धतियों आयुर्वेद, योग, होम्योपैथि, युनानी और सिद्धा इत्यादि के विकास के लिए आयुष विश्वविद्यालय की स्थापना की जा रही है। उन्होने कहा कि गुणात्मक शिक्षा से ही देश और समाज की उन्नति संभव है और प्रदेश में पंडित दीन दयाल उपाध्याय के नाम से मैडिकल यूनिवर्सिटी स्थापित की जा रही है। 
09042018
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