राष्ट्र के सर्वांगीण विकास में लेखकों को अधिक कारगर भूमिका निभानी होगी-राज्यपाल 13.03.2018

March 14, 2018
चंडीगढ, 13 मार्च। राष्ट्र के सर्वांगीण विकास में लेखकों को अधिक कारगर भूमिका निभानी होगी। वर्तमान भौतिकवादी युग में देश व समाज को आगे बढाने में उनकी आवाज का महत्व पहले से कहीं अधिक है। पहले की तरह आज भी विसंगतियों और कुरीतियों को कलम की धार से ही काटा जा सकता है। ये उद्गार हरियाणा के राज्यपाल प्रो0 कप्तान सिंह सोलंकी ने आज हरियाणा राजभवन में डाॅ0 वेदप्रकाश नागपाल द्वारा लिखित पुस्तक ‘पंचकुला के प्रकाश स्तम्भ’ के विमोचन के बाद अपने सम्बोधन में व्यक्त किए। पुस्तक में पंचकुला में रहने वाले विभिन्न क्षेत्रों में देश व समाज की महान सेवा करने वाले महानुभावों के जीवन और कार्याें का विवरण है।
राज्यपाल ने आगे कहा कि किसी भी क्षेत्र, प्रदेश अथवा देश का महत्व वहां की भौतिक समृद्धि की अपेक्षा वहां रहने वाले महापुरूषों से अधिक होता है। वे महापुरूष ही वहां के समाज का निर्माण करते हैं और अच्छी व स्वस्थ परम्पराएं डालते हुए अगली पीढियों का भी मार्गदर्शन करते हैं कि जीवन को कैसे जीया जाए। इसलिए पुस्तक ‘पंचकुला के प्रकाश स्तम्भ’ इसमें वर्णित महानुभावों के जीवन-मूल्यों, आदर्शों और सिद्धांतों से नई पीढियों को सीख लेने की प्रेरणा देती रहेगी। 
पुस्तक के लेखन डाॅ0 वेदप्रकाश नागपाल को बधाई देते हुए प्रो0 सोलंकी ने कहा कि बच्चों और युवाओं को अच्छा बनाना है तो ऐसी पुस्तकों में वर्णित महापुरूषों का जीवन-चरित अवश्य पढाएं।
इससे पहले हरियाणा साहित्य अकादमी के उपाध्यक्ष राधेश्याम शर्मा ने विचार रखे।  कवि एवं लेखक बी0डी0 कालिया हमदम ने पुस्तक का परिचय दिया। उन्होंने कहा कि लेखक ने महान विभूतियों के आदर्शों, विचारों तथा जीवन-संघर्ष को प्रस्तुत करते हुए यह भी दिखाने की चेष्टा की है कि उन्होंने कैसे देश व समाज का सपना संजोया था और उस को साकार करने के लिए आजीवन स्वयं क्या किया। लेखक ने साहित्य, पत्रकारिता, प्रषासन, चिकित्सा, उद्योग, समाजसेवा, संगीत आदि जीवन के सब महत्वपूर्ण क्षेत्रों की प्रतिभाओं को अपनी पुस्तक में स्थान दिया है। ऐसे मानवसेवकों की जीवन-यात्रा पुस्तक के रूप मंे प्रस्तुत कर युवा पीढ़ी को निष्ठा और साहस के साथ कत्र्तव्यपथ पर अग्रसर होने की प्रेरणा दी गई है।
इस अवसर पर कालका से विधायक लतिका शर्मा, राज्यपाल के सचिव डाॅ0 अमित कुमार अग्रवाल, अनेक साहित्यकार व गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
13032018
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