राज्यपाल श्री सत्यदेव नारायण आर्य ने कहा कि हमे संकीर्ण सोच व वैमनस्य की भावना से उपर उठकर गीता उपदेश का अनुसरण करते हुए प्रत्येक गरीब व जरूरतमंद व्यक्ति की मदद करनी चाहिए-18.09.2018

September 18, 2018

चण्डीगढ़ः 18 सितम्बर: हरियाणा के राज्यपाल श्री सत्यदेव नारायण आर्य ने कहा कि हमे संकीर्ण सोच व वैमनस्य की भावना से उपर उठकर गीता उपदेश का अनुसरण करते हुए प्रत्येक गरीब व जरूरतमंद व्यक्ति की मदद करनी चाहिए तभी समाज में आपसी समानता होगी जिससे सामाजिक सदभाव बढ़ेगा।

 आज राज्यपाल श्री सत्यदेव नारायण आर्य राजभवन में पहले से तय कार्यक्रम अनुसार लोगो से मिल रहे थे। आज हरियाणा पिछड़ा वर्ग के चेयरमैन श्री रामचन्द्र जांगड़ा, राज्यपाल श्री सत्यदेव नारायण आर्य से मिले। राज्यपाल श्री आर्य ने कहा कि गीता विभिन्न ग्रंथों का सार है और गीता मानव जीवन जीने की पद्धति सिखाती है इसलिए प्रत्येक व्यक्ति जीवन में गीतापोदेश उतारें। उन्होंने कहा कि संघर्ष ही जीवन है संघर्ष के बिना मनुष्य मृत्यु के समान है गीता उपदेश से हमें संघर्ष की प्रेरणा मिलती है।जैसा कि गीता के 8/7वे श्लोक मे कहा गया है।

तस्मात्सर्वेषु कालेषु मामनुस्मर युध्य च। 

मय्यर्पितमनोबुद्धिर्मामेवैष्य स्यसंशयम् 

अर्थात संघर्षो से मन घबराए नहीं मजबूत रहे यही गीता प्रेरणा है। 

राज्यपाल ने श्री रामचंद्र जांगड़ा से हरियाणा राज्य पिछड़ा वर्ग कल्याण निगम द्वारा चलाई जा रही योजनाओं व कार्यक्रमो की जानकारी ली तथा इस दिशा में बेहतर कार्य करने को कहा जिससे निगम की योजनाओं का प्रत्येक जरूरतमंद व्यक्ति को लाभ मिल सके। इसके साथ-साथ बिहार से आए श्रीनाथ मिश्रा ने भी राज्यपाल से मुलाकात की। श्री आर्य ने बिहार की  राजीखुशी बारे पूछा व सामाजिक-आर्थिक विषय पर विस्तार से चर्चा भी की।