जैनेंद्रा गुरुकु ल स्कूल द्वारा स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष्य आयोजित समारोह-14.08.2018

August 15, 2018

पंचकूला, 14 अगस्त- हरियाणा के राज्यपाल प्रो. कप्तान सिंह सोलंकी ने जैनेंद्रा गुरुकु ल स्कूल द्वारा स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष्य आयोजित समारोह में मुख्यातिथि के रूप में शिरकत की। उन्होंने कार्यक्रम की शुरूआत परंपरागत दीप प्रज्जवलित कर की। 

इस मौके पर पंचकूला विधायक एवं मुख्य सचेतक ज्ञानचंद गुप्ता, उपायुक्त मुकुल कुमार, डीसीपी अभिषेक जोरवाल, अतिरिक्त उपायुक्त जगदीप ढांडा, एसडीएम पंकज सेतिया, तहसीलदार वीरेन्द्र गिल, जिला भाजपा प्रधान दीपक शर्मा, जिला भाजपा महासचिव हरेंद्र मलिक, जिला लोक संपर्क एवं कष्ट निवारण समिति के सदस्य श्यामलाल बंसल, गुरुकुल के प्रधान सुभाष ओसवाल, सचिव वीके जैन तथा संस्था के अन्य प्रतिनिधियों सहित स्कूली बच्चें, शिक्षक व उनके अभिभावक भी उपस्थित थे।

राज्यपाल ने स्वतंत्रता सेनानियों, देशभक्तों व अमर शहीदों को नमन करते हुए कहा कि उनके त्याग और बलिदानों के कारण लंबे ऐतिहासिक संघर्ष के बाद हमें आजादी मिली है। उन्हीें के बलिदानों के कारण आज हम खुली हवा में सांस ले रहे है। उन्होंने कहा कि हरियाणा के लोगों ने भी मातृभूमि को गुलामी की जंजीरों से आजाद करवाने में कुर्बानी दी। देश के प्रत्येक नागरिक का कत्र्तव्य है कि हमें देश की एकता, अखंडता को और मजबूत बनाने के लिए सदैव तत्पर रहना चाहिए ताकि अमर शहीदों द्वारा दी गई कुर्बानी बेकार न जाए। भारतीय संस्कृति को सशक्त बनाने के लिए किसी राजनेताओं का हाथ नहीं है अपितु जैन संतों ने भी इस दिशा में बेहतर कार्य किया है और भविष्य में भी कर रहे है। उन्होंने कहा कि गुरुकुल का कार्य 1929 में प्रारंभ किया गया था और यहां से अच्छे संस्कारों की शिक्षा  प्राप्त कर बहुत से लोगों ने समाज के हित मे ंकार्य किए है और निरंतर करते जा रहे है। यही कारण है कि जैन संतों द्वारा खोले गए गुरुकुल शिक्षा के क्षेत्र में अहम भूमिका निभा रहे है।

उन्होंने कहा कि अच्छे संस्कार हम कहीं से भी प्राप्त नहीं कर सकते, यह केवल स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालय में ही मिलते है। गुरुकुल स्कूल ये संस्कार देने मे ंदेश में ही नहीं अपितु विश्व में अहम भूमिका निभा रहे है। उन्होंने लार्ड मैकाले की सोच पर भी प्रकाश डालते हुए कहा कि उनकी सोच भारत में ऐसी शिक्षा पद्धति लागू करने की थी कि भारतीय गुलामी में जीते रहे। उन्होंने कहा कि आजादी की चिंगारी अंबाला से ही शुरू हुई थी। यह कारण नहीं कि गुलामी के समय से ही देश के लोगों ने मातृ भूमि को आजाद करवाने की दिशा में संघर्ष आरंभ किए हुए था। उन्होंने झांसी की रानी लक्ष्मीबाई की कुर्बानी पर भी प्रकाश डाला। देश में ऐसे तीसरे लोग भी थे, जिनकी सोच थी कि आजादी के बाद फिर गुलाम न हुआ जाए, इसके लिए शिक्षा पद्धति में परिवर्तन लाना अति आवश्यक था। उन्होंने कहा कि गुरुकुल यूनिवर्सिटी बनाने की तैयारी कर रहा है और वह अपने इस संकल्प में अवश्य ही सफल होंगे। इस अवसर पर राज्यपाल ने पौधारोपण भी किया। उन्होंने गुरुकुल के बच्चों द्वारा देश भक्ति के गीतों की भी भरपूर सराहना की। उन्होंने कहा कि विद्यालय के छोटे-छोटे बच्चों के आजादी के गीत की गूंज से देश के अमर शहीदों के प्रति भावर्पण श्रद्धा अर्पित की। 

"

"

"