राज्यपाल श्री सत्यदेव नारायण आर्य वीरवार को ‘‘राजगीर से राजभवन’’ नामक पुस्तक का विमोचन करते हुए 05.04.2021

April 05, 2021

चण्डीगढ़ 01 अप्रैलः-  हरियाणा के राज्यपाल श्री सत्यदेव नारायण आर्य ने वीरवार को राजभवन में अपने ही जीवन पर लिखित ‘‘राजगीर से राजभवन’’ नामक पुस्तक का विमोचन किया। यह पुस्तक कुरूक्षेत्र के लेखक गुरप्रीत सिंह द्वारा लिखी गई है और पुस्तक ‘‘बुक्स क्लीनिक प्रकाशन’’ द्वारा प्रकाशित की गई है। श्री आर्य ने लेखक को शुभकामनाएं दी और कहा कि एक पुस्तक व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक और प्रेरणादायी दृष्टिकोण अपनाने में महत्वपूर्ण भूमिक अदा करती है। इसके साथ-साथ पुस्तकें युवा पीढ़ी को पठन-पाठन और गहन अध्ययन की ओर एकाग्र करती है। वर्तमान में यह और भी प्रासंगिक है कि युवा पीढ़ी पुस्तकों से जुड़ कर अध्ययन व अनुसन्धान का कार्य करे।
लेखक ने ‘‘राजगीर से राजभवन’’ नामक पुस्तक में राज्यपाल श्री आर्य के जीवन चरित्र पर प्रकाश डालकर युवा पीढ़ी के लिए एक प्रेरणदायी संदेश देने का प्रयास किया है। पुस्तक लेखक गुरप्रीत सिंह ने बताया कि उनका पुस्तक लिखने का लक्ष्य मानव सेवा के उजाले में सर्वजन हिताय-सर्वजन सुखाय के दृष्टिकोण को प्रदर्शित करना भी रहा है।
पुस्तक में दर्शाया गया है कि राज्यपाल श्री आर्य बिहार की राजनीति के पुरोधा रहे हैं। उनके राजनीतिक जीवन में किए गए विकास कार्यों का भी पुस्तक में समावेश किया गया है। श्री आर्य ने सादगी भरा जीवन जीने के साथ-साथ गरीब व दबे कुचले लोगों में शिक्षा के प्रचार-प्रसार का काम किया है। इस पर भी लेखक ने लेखनी का सटीक प्रयोग कर युवा पीढ़ी के लिए एक सकारात्मक संदेश देने का प्रयास किया है। पुस्तक को हरियाणा में हुए विभिन्न कार्यक्रमों के चित्रों से भी सजाया गया है। चित्रों, संवादों व लेखों से स्पष्ट झलक दिखती है कि राज्यपाल श्री आर्य ने प्रदेश के विकास में गहन रूचि दिखाई है।
कैप्शन- हरियाणा के राज्यपाल श्री सत्यदेव नारायण आर्य वीरवार को ‘‘राजगीर से राजभवन’’ नामक पुस्तक का विमोचन करते हुए। 




चण्डीगढ़ 01 अप्रैलः- प्राचीन वैदिक पद्धति और आधुनिक वैज्ञानिक तकनीक से ईजाद की गई तकनीकों का प्रयोग कर दिव्यांग व्यक्तियों को हर कार्य के लिए सक्षम बनाया जा सकता है जिससे वे समाज की मुख्य धारा से जुड़ कर राष्ट्र निर्माण में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। यह बात हरियाणा के राज्यपाल श्री सत्यदेव नारायण आर्य ने वीरवार को राजभवन में न्यूरो सांइटिफिक पद्धति का डेमों देखने उपरान्त कही। इस पद्धति का प्रदर्शन वीरवार को गुरू जम्भेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, हिसार के प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर जितेन्द्र कुमार ने दिया जो बे्रन एक्टीवेशन ट्रेनिंग पर काम कर रहे हैं। जितेन्द्र कुमार के साथ दो बच्चे रिया (13) और आर्यन (11) भी थे।
जितेन्द्र कुमार ने इस न्यूरो सांइटिफिक तकनीक के बारे में बताया कि इस तकनीक के माध्यम से दृष्टिहीन व्यक्ति बहुत ही आसानी से रंगों की पहचान कर सकता है। इस तकनीक की खोज़ भारतीय वैदिक परम्परा और आधुनिक वैज्ञानिक के सहयोग से की गई है। ऋग्वेद में उदृत नादयोगा और यजुर्वेद में उदृत गहन ध्यान पद्धति से ही एक दृष्टिहीन व्यक्ति बहुत आसानी से रंगों की पहचान कर लेता है। इस तकनीक के सहयोग से सामान्य बच्चों में भी एकाग्रता बढ़ती है। जिससे वे पढ़ाई में और अधिक अच्छा कर पाते हैं। उन्होंने बताया कि इस थैरेपी का प्रयोग करने से आम आदमी की याद्दाश्त, एकाग्रता और मानसिक संतुलन बेहतर होता है। इसी वजह से इसको तीसरा नेत्र भी कहा गया है।
राज्यपाल श्री आर्य ने कुमारी रिया और आर्यन द्वारा दिए गए डेमोस्टरेशन को देखा। रिया और आर्यन दोनों बच्चों ने आंख बंद कर किसी भी पुस्तक के लेखक, प्रकाशन और विषय वस्तु के बारे में बताया। इस पर श्री आर्य ने जितेन्द्र कुमार और दोेनों बच्चों को शुभकामनाएं दी।  
कैप्शन- हरियाणा के राज्यपाल श्री सत्यदेव नारायण आर्य गुरू जम्भेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के जितेन्द्र कुमार व रिया व आर्यन को शुभकामनाएं देते हुए।