राज्यपाल श्री सत्यदेव नारायण आर्य कुरूक्षेत्र के गांव मथाना में सामाजिक समरसता भवन का शिलान्यास करते हुए-13.07.19

July 16, 2019
चण्डीगढ़, 13 जुलाईः- हरियाणा के राज्यपाल श्री सत्यदेव नारायण आर्य ने कहा कि सन्त शिरोमणी गुरू रविदास जी महाराज व अन्य महापुरूषों द्वारा सामाजिक समरसता के संदेश को देश के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने और गति दी है, जिससे आमजन में देश-प्रेम और राष्ट्रीय एकता की भावना और अधिक सुदृढ़ हुई है। 
श्री आर्य कुरूक्षेत्र जिले के मथाना गांव में सामाजिक समरसता भवन आधारशिला रखने के बाद सामाजिक समरसता सम्मेलन को सम्बोन्धित कर रहे थे। उन्होनें अपने ऐच्छिक कोष से भवन के लिए 15 लाख की राशि देने की घोषणा की तथा उन्होनें शिलान्यास स्थल के पास ही पौधारोपण भी किया।
राज्यपाल ने कहा कि जब-जब देश और समाज में ऊंच-नीच, भेदभाव, जाति-पाति धर्मभेद आदि कुरीतियों का जन्म हुआ है तब-तब समाज व देश कमजोर हुआ है। समाज में जब कभी भी आक्रमणकारियों व विदेशी शक्तियों द्वारा सामाजिक समरसता को मिटाने का प्रयास किया गया तब महापुरूषों ने इस धरती पर जन्म लिया, इन महापुरूषों में संत शिरोमणी गुरू रविदास का नाम बडे़ आदर से लिया जाता है। उन्होंने कहा कि गुरू रविदास के साथ ही गुरू नानक जी, महात्मा बुद्ध, कबीर दास और बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर जी का चिंतन दर्शन समाज में एक नई सांस्कृतिक परिवर्तन प्रदर्शित कर रहा है। देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी सामाजिक समरसता की परंपरा को तेजी से आगे बढ़ाया है। 
उन्होंने कहा कि गुरू रविदास जी द्वारा दिए गए सब समान बसें विचार को आगे बढ़ाते हुए प्रधानमंत्री ने सबका साथ-सबका विकास और सबका विश्वास का नारा दिया। संत गुरू रविदास महाराज कहते थे कि मनुष्य जन्म से छोटा या बड़ा नहीं होता। गुरू रविदास जाति व्यवस्था के घोर विरोधी थे। उन्होंने कहा कि हमें देश और समाज में दबे- कुचले और गरीब लोगों को आगे लाने के लिए शिक्षा के अवसर उपलब्ध करवाने होंगे।  कोई भी इन्सान ऊंचा उठना चाहे तो वह शिक्षा, संघर्ष, कडी मेहनत, ईमानदारी से ही ऊंचा उठ सकता है। 
श्री आर्य ने कहा कि बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर संघर्ष के एक जीते जागते उदाहरण है। संविधान के रचियता बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर ने दबे कुचले और गरीब लोगों को मुख्य धारा में लाने के लिए संविधान में आरक्षण का प्रावधान किया। जिस कारण लोकसभा, विधानसभा, सरकारी सेवा एवं पढ़ाई में आबादी के आधार पर आरक्षण मिला। जिसका लाभ अनुसूचित जातियों को मिल रहा है। उन्होंने कहा कि बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर ने गरीबों के उत्थान के लिए तीन सूत्र दिए शिक्षित बनों, संगठित रहो, संघर्ष करो। इसी तरह आर्य समाज के संस्थापक स्वामी दयानन्द सरस्वती ने भी अछुतोद्घार का आन्दोलन चलाया था, उन्होंने अछूतों को गले लगाया, बेटियों को शिक्षित बनाने तथा विधवा विवाह जैसे अनेक समाज सुधार के कार्य किए थे। उन्होंने कहा कि हम सबका यह कर्तव्य बनता है कि बच्चों को शिक्षित बनाकर संस्कारित करें तथा महर्षि वाल्मीकि, संत गुरू रविदास, कबीरदास, महात्मा ज्योतिबा फुले, बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर तथा स्वामी दयानंद सरस्वती जैसे महापुरूषों के समतामूलक विचारों को आगे बढ़ाएं ताकि इससे राष्ट्र और समाज मजबूत होगा। 
 
विधायक डा. पवन सैनी ने कहा कि आज समाज को एक जुट होने की जरूरत है, जब सभी सम्प्रदाय एक जुट होकर रहेंगे तो भारत विश्व गुरू बन सकेगा। समाज के लोगों को महान संतों और महान पुरूषों के विचारों को गहन करके देशहित के लिए काम करना होगा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लक्ष्य निर्धारित किया है कि वर्ष 2022  तक सबकों मकान, बिजली, रसोई गैस और पीने का पानी मिलेगा। विधायक डा. पवन सैनी ने तीन लाख रुपए की अनुदान राशि देने की घोषणा की है। इसी तरह से जिला परिषद के अध्यक्ष गुरदयाल सुनहरी ने भी भवन निर्माण के लिए तीन लाख रूपये देने की घोषणा की। ज्वालापुर (उत्तराखण्ड) के विधायक सुरेश राठौर ने भी अपने विचार व्यक्त किए। सामाजिक एवं न्याय अधिकारिता मंत्रालय के सदस्य एवं कार्यक्रम के संयोजक सुरजभान कटारिया ने कहा कि सामाजिक समरसता भवन को भव्य बनाया जाएगा। इसमें एक म्यूजिम भी तैयार किया जाएगा। इस भवन के माध्यम से समाज के लोगों को जोडने और महान संतों के विचारों से आत्मसात करवाने का काम किया जाएगा। राज्यपाल ने सराहनीय कार्य करने वाले लोगों को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। 
 
कैप्शन 1ः- हरियाणा के राज्यपाल श्री सत्यदेव नारायण आर्य कुरूक्षेत्र के गांव मथाना में सामाजिक समरसता भवन का शिलान्यास करते हुए।
कैप्शन 2ः- हरियाणा के राज्यपाल श्री सत्यदेव नारायण आर्य कुरूक्षेत्र के गांव मथाना में पौधारोपण करते हुए।
 
कैप्शन 3ः- हरियाणा के राज्यपाल श्री सत्यदेव नारायण आर्य कुरूक्षेत्र के गांव मथाना में आयोजित सामाजिक समरसता सम्मेलन को सम्बोन्धित करते हुए।
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