सेक्टर 24 स्थित होटल पार्क व्यू में ज्योतिष व आयुर्वेद पर आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन -07.07.2018

July 09, 2018

चण्डीगढ, 7 जुलाई।     आयुर्वेद मन, बुद्धि आत्मा का भी परिष्कार करता है। यह केवल शरीर की चिकित्सा का साधनमात्र नहीं है। इसलिए इसे पंचम वेद की संज्ञा दी गई है। ये उदगार हरियाणा के राज्यपाल प्रो0 कप्तान सिंह सोलंकी ने स्थानीय सेक्टर 24 स्थित होटल पार्क व्यू में ज्योतिष व आयुर्वेद पर आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन में बोलते हुए व्यक्त किए। सम्मेलन का आयोजन ज्योतिष प्रांगण संस्था द्वारा किया गया था। राज्यपाल ने देशभर से सम्मेलन में आए ज्योतिषाचार्याें और आयुर्वेदाचार्यों को सम्मानित किया। 

प्रो0 सोलंकी ने आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति के चिकित्सकों का आह्वान किया कि वे चिकित्सा करने से पहले आदमी को समझें। क्योंकि यदि आदमी को नहीं समझ पाएंगे तो इलाज भी नहीं कर पाएंगे। उन्होंने कहा कि व्यक्ति के अंदर संपूर्ण ब्रह्मण्ड विद्यमान है। इसी कारण ग्रहों, नक्षत्रों आदि का उसके जीवन पर प्रभाव रहता है। हमारे विद्वानों ने इस बात को वैज्ञानिक ढंग से समझ लिया था। लेकिन विदेशी शासन के दौरान हमारा वह ज्ञान लुप्तप्राय हो गया। नए भारत के निर्माण के लिए उस प्राचीन ज्ञान को पुनः स्थापित करना है। ऐसा करने के बाद ही हम सम्पूर्ण स्वतंत्रता प्राप्त कर पाएंगे।

राज्यपाल ने कहा कि हमारे चारों वेदों ने हमें एक जीवन-शैली प्रदान की है जिसे अपनाकर व्यक्ति नर से नारायण बन सकता है। लेकिन संसार के सम्पर्क में आने से इस व्यक्ति में कुछ विकार आ सकते हैं। ऐसे सब विकारों को दूर करने का ज्ञान ज्यातिष व आयुर्वेद में है। 

योग के महत्व का जिक्र करते हुए राज्यपाल ने कहा कि यदि हम योग के अनुसार जीवन को चलाते हैं तो अनेक विकार स्वयं ही ठीक हो जाते हंै। उन्होंने कहा कि भारत को जानना है तो योग, आयुर्वेद, गीता सहित सम्पूर्ण भारतीय संस्कृति को जानना जरूरी है। इस भारत को जाने बिना हमारी आजादी का भी कोई मतलब नहीं है।

प्रो0 सोलंकी ने कहा कि 21वीं सदी में जब संयुक्त राष्ट्र संघ जैसी संस्था भी विश्वशांति स्थापित करने में अक्षम है तो हमारी संस्कृति द्वारा मानवमात्र को प्रदान की गई योगशिक्षा इस काम को सफलतापूर्वक कर सकती है। इसीलिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने विश्व को संदेश दिया कि आप शान्ति चाहते हैं तो योग को अपनाइए। इसका 177 देशों ने तुरन्त समर्थन किया और संयुक्त राष्ट्र संघ ने 21 जून को अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस घोषित किया व दुनिया इसे मनाती है। यह भारत के ज्ञान-विज्ञान की बहुत बड़ी विजय है। 

सम्मेलन में ज्यातिष के विद्वान मदन कुमार स्वामी ने कहा कि योग दिवस की तरह नव संवत के दिन ज्योतिष दिवस मनाया जाना चाहिए। ज्यातिषाचार्य अजय भाम्बी ने भी विचार रखे। ज्योतिष प्रांगण संस्था की अध्यक्ष श्रीमती पूनम शर्मा ने सबका स्वागत किया और लेखराज शर्मा ने धन्यवाद किया।