गुरुग्राम के आर्टिमिस अस्पताल में हरियाणा की पहली चैस्ट फोरम की दो दिवसीय कान्फ्रेंस का उद्घाटन-21.04.2018

April 23, 2018
 गुरुग्राम, 21 अप्रैल। हरियाणा के राज्यपाल प्रो. कप्तान सिंह सोलंकी ने आज गुरुग्राम के आर्टिमिस अस्पताल में हरियाणा की पहली चैस्ट फोरम की दो दिवसीय कान्फ्रेंस का उद्घाटन करते हुए कहा कि हरियाणा को सर्वश्रेष्ठ बनाना चाहते हैं, इसके लिए यह पहल इस फोरम द्वारा की गई है। उन्होंने कहा कि हम अपनी खराब आदतों के कारण कई बीमारियां पाल लेते हैं, उसके बारे में जागरूकता फैलाकर उन बीमारियों को होने से रोका जा सकता है। 
 
प्रो. सोलंकी ने छाती रोगों के फैलाव को रोकने के लिए फोरम द्वारा चलाए जाने वाले जागरूकता अभियान की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह मानव की सेवा का काम है जिसकी देश को जरूरत है। इसके साथ राज्यपाल ने यह भी कहा कि वे हरियाणा को बिमारी ग्रस्त राज्य नही मानते थे क्योंकि इस राज्य की उपलब्धियां देश ही नही विदेशो मे भी हैं। दूसरे राज्यों के लोग हरियाणावासियों को सशक्त मानते हैं। आमतौर पर कहा जाता है कि ‘देसां में देस हरियाणा, जित दूध दही का खाणा’ तो जहां खान पान अच्छा हो और प्रदेश के खिलाडिय़ों ने अपना लोहा दुनिया में मनवाया हो, उसे सभी सशक्त ही मानेंगे। उन्होंने बताया कि हाल ही में आस्ट्रेलिया के गोल्ड कोस्ट में संपन्न हुए राष्ट्रमंडल खेलों में भारत को मिले कुल 66 पदकों में से 22 पदक हरियाणा के खिलाडिय़ो ने जीते हैं जबकि हरियाणा की आबादी देश की कुल आबादी की मात्र 2 प्रतिशत है। 
 
उन्होंने कहा कि हरियाणा जिस काम को हाथ में लेता है तो उसमें अभूतपूर्व परिणाम मिलते हैं। प्रो. सोलंकी ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा जनवरी 2015 में हरियाणा के पानीपत से शुरू किए गए राष्ट्रव्यापी बेटी बचाओं बेटी पढ़ाओं अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय देश के 100 जिलों में लिंगानुपात गड़बड़ाया हुआ था जिनमें से 16 जिले हरियाणा के थे। उस समय हरियाणा का लिंगानुपात 1000 लडक़ों के विरूद्ध 830 लड़कियों का था जो अब बढक़र 1000 लडक़ों के विरूद्ध 914 का हो गया है और अब यह अनुमान लगाया जा रहा है कि एक साल में यह अनुपात 950 हो जाएगा। प्रो. सोलंकी ने कहा कि इसी प्रकार इंडियन चैस्ट सोसायटी की हरियाणा इकाई इलाज के साथ लोगोंं में जागरूकता लाकर प्रदेश से छाती व क्षयरोगों का सफाया करने में सफल रहेगी। हरियाणा इकाई का गठन हुए अभी मात्र एक वर्ष ही हुआ है। 
 
प्रो. सोलंकी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नया भारत  बनाने के प्रयासों का विस्तार से उल्लेख किया और कहा कि इसमें हरियाणा अव्वल है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री उज्जवला योजना के तहत हरियाणा में 3 लाख परिवारों को मुफ्त एलपीजी कनेक्शन दिए गए। पूरा प्रदेश ओडीएफ हो चुका है तथा हरियाणा डिजीटल क्रान्ति तथा ईज़ आफ डूइंग बिजनेस में देश में नंबर वन है। उन्होंने नीति आयोग का भी जिक्र किया और कहा कि यह नेशनल इंस्टीटयूट ऑफ ट्रांसफोर्मिंग इंडिया का आयोग है। प्रधानमंत्री बार बार कहते हैं कि हमे देश में रिफोर्म नही अपितु परफोर्म करना है ताकि देश ट्रांसफोर्म हो सके। 
 
इससे पहले आयोजन समिति के अध्यक्ष डा. हिमांशु गर्ग, सचिव डा. प्रतिभा डोगरा, साईंटिफिक चेयरमैन सुशील धमीजा, एसोसिएशन ऑॅफ फिजिशियन्स ऑफ इंडिया के सचिव डा. कमल किशोर, आर्टिमिस अस्पताल की प्रबंध निदेशक तथा कार्यक्रम की संरक्षक डा. देबलिना चक्रबर्ती ने भी अपने विचार रखे। डा. गर्ग ने हरियाणा की संस्कृति में प्रचलित हुक्का पीने की ओर इशारा करते हुए कहा था कि इस संस्कृति को बदलने के लिए मुहिम चलानी पड़ेगी, जिसमें सभी के सहयोग की आवश्यकता है। 
 
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 गुरुग्राम, 21 अप्रैल। हरियाणा के राज्यपाल प्रो. कप्तान सिंह सोलंकी ने आज अधिकारियों को जनसेवा का पाठ पढ़ाते हुए कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में हम प्रशासक नही बल्कि जनसेवक है और जनता की इच्छा तथा आकांक्षा को पूरा करना हमारा कत्र्तव्य है। 
 
प्रो. सोलंकी आज गुरुग्राम जिला प्रशासन द्वारा हरियाणा लोक प्रशासन संस्थान(हिपा) में 12वें सिविल सर्विसिज़ डे पर आयोजित कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे। इस कार्यक्रम का शुभारंभ आज प्रात: भारत निर्वाचन आयोग के निर्वाचन आयुक्त अशोक लवासा द्वारा किया गया था। कार्यक्रम में हरियाणा सरकार के पूर्व मुख्य सचिव तथा भारत सरकार में सचिव के पद पर रहे एम सी गुप्ता तथा हिपा के महानिदेशक डा. जी प्रसन्ना कुमार भी उपस्थित थे। 
 
सिविल सर्विसिज डे पर अपना संदेश देते हुए प्रो. सोलंकी ने कहा कि आज का दिन सिविल सेवा के अधिकारियों के लिए आत्ममंथन का दिन है और सभी अधिकारी यह मंथन करें कि किस भावना, नीयत तथा आकांक्षा से हमें जनता के बीच काम करना है। उन्होंने तुलसीदास और महात्मा गांधी के उदाहरण देते हुए कहा कि जब भी कोई व्यक्ति आपके पास काम के लिए आता है तो सोचें कि यह मेरा पहला कत्र्तव्य है कि मुझे इसकी दुख तकलीफ दूर करनी है, आपमें ऐसी भावना होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी कहा करते थे कि अच्छी सरकार वह है जिसमें कम से कम शासन हो और अच्छा गांव वह है जिसमें कोई शिकायत ना करे बल्कि लड़ाई झगड़ों का निपटारा आपस से मिल बैठकर कर लें। उन्होंने कहा कि ऐसा वातावरण पैदा करने के लिए प्रत्येक व्यक्ति की सोच बदलनी पड़ेगी। 
 
राज्यपाल ने कहा कि अधिकारी चार ‘आ’ अर्थात् आस्था, आत्मसंयम, आत्मीयता तथा आध्यात्मिकता को अपनाएंगे तो अवश्य सफल होंगे। उन्होंने बताया कि अधिकारी की संविधान के प्रति आस्था यानि देश के प्रति आस्था हो। हम कोई भी काम करें या योजना बनाएं तो उसमें यह ध्यान रखें कि उसका समाज में अंतिम व्यक्ति पर क्या प्रभाव पड़ेगा, यही संविधान की मूल भावना है। प्रो. सोलंकी ने कहा कि आत्मसंयम का अर्थ है कि आप स्वयं अनुशासन में रहें । उन्होंने कहा कि आप कोई भी कार्य करें यहां तक कि परिवार में रहते हुए भी आत्मसंयम की जरूरत होती है। इसी प्रकार, आप अपने आप को समाज का अंग समझे और समाज के साथ स्वयं का एकाकार करें। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को अपनी इच्छाओं पर नियंत्रण रखना चाहिए क्योंकि इच्छाओं का अंत नही है। यह अध्यात्मिकता है। इसके साथ प्रो. सोलंकी ने डा. भीमराव अंबेडकर का जिक्र करते हुए कहा कि संविधान समिति ने जब संविधान पेश किया था उस समय डा. अंबेडकर ने अपने पहले भाषण में कहा था कि अच्छी चीज को क्रियान्वित करने वाला व्यक्ति यदि अच्छा नही होगा तो उसके परिणाम भी अच्छे नही होंगे। इसके विपरीत यदि बुरी चीज को भी कोई अच्छा व्यक्ति क्रियान्वित करता है तो उसके परिणाम अच्छे आएंगे।
 
आज के इस सिविल सर्विसिज डे के उद्घाटन सत्र में बोलते हुए भारत के निर्वाचन आयुक्त अशोक लवासा ने देश के पहले गृह मंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने सिविल सेवाओं को ‘स्टील फ्रेम’  के समान बताया था । उन्होंने कहा कि आजादी के बाद अब तक देश में काफी उन्नति हुई है, लोगों मे उत्साह बढ़ा है और साथ ही लोगों की उम्मीदें भी ज्यादा हो गई हैं। लोग चतुर और शायद बेईमान भी हो गए हैं। ऐसी स्थिति में लोगों को संभालकर विकास करवाना सिविल सेवा के अधिकारियों की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को ड्यूअल रोल अदा करना होता है, एक तो रेगुलेट करना तथा दूसरा, बदलाव का वातावरण पैदा करना है। यह एक चुनौती भरा कार्य है। श्री लवासा ने कहा कि उनके अनुसार सिविल सर्विसिज़ के इंस्टीटयुशन को समय के साथ अपने आप को बदलना है परंतु तीन मूल मंत्रों को बदला नही जा सकता जिनमें रूटीन कार्य पर फोकस करना, हमें लोगों के प्रति रिस्पांसिव रहना तथा सकारात्मक सोच के साथ हर समस्या का हल ढूढऩा शामिल है। 
 
हरियाणा सरकार के सेवानिवृत मुख्य सचिव 1960 बैच के आईएएस अधिकारी रहे एम सी गुप्ता ने भी अपने अनुभव सांझे किए और कहा कि अधिकारियों को भागवत् गीता तथा भारतीय संविधान की प्रस्तावना को ध्यान में रखकर अपने कत्र्तव्य का निर्वहन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि सिविल सेवा के अधिकारी में तीन गुण- हर कार्य को करने की क्षमता, उच्च अधिकारियों द्वारा किए गए विश्वास व्यक्त पर पूरा उतरना तथा अपने सहयोगियों , वरिष्ठ अधिकारियों व आम जनता को साथ लेकर चलने की क्षमता होनी चाहिए। चौथा गुण जोड़ते हुए उन्होंने कहा कि अधिकारी को बार बार अपने आप को पुन: परिभाषित करते रहना चाहिए। साथ ही श्री गुप्ता ने कहा कि हमें यह पता होना चाहिए कि हमारे से क्या अपेक्षित है, उसी अनुरूप हम अपनी ड्यूटी का निर्वहन करें। 
 
आज के 12वें सिविल सर्विसिज़ डे पर चार योजनाओं- प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, डिजिटल पैमेंट तथा पंडित दीन दयाल उपाध्याय कौशल विकास योजना पर फोकस किया गया था। इन योजनाओं पर कार्यक्रम में प्रैजेंटेशन भी दी गई। इस कार्यक्रम में गुरुग्राम जिला के विभिन्न क्षेत्रों मे सराहनीय करने वाले 21 अधिकारियों को भी सम्मानित किया गया। 
 
कार्यक्रम में उपायुक्त विनय प्रताप सिंह ने आए हुए सभी अतिथियो का धन्यवाद ज्ञापित किया। इस अवसर पर हिपा के महानिदेशक डा. जी प्रसन्ना कुमार ने भी अपने विचार रखे। कार्यक्रम में हिपा के प्रवर निदेशक एम डी सिंहा, डीसीपी मुख्यालय दीपक गहलोत भी उपस्थित थे। 
 गुरुग्राम, 21 अप्रैल। हरियाणा के राज्यपाल प्रो. कप्तान सिंह सोलंकी ने आज गुरुग्राम के आर्टिमिस अस्पताल में हरियाणा की पहली चैस्ट फोरम की दो दिवसीय कान्फ्रेंस का उद्घाटन करते हुए कहा कि हरियाणा को सर्वश्रेष्ठ बनाना चाहते हैं, इसके लिए यह पहल इस फोरम द्वारा की गई है। उन्होंने कहा कि हम अपनी खराब आदतों के कारण कई बीमारियां पाल लेते हैं, उसके बारे में जागरूकता फैलाकर उन बीमारियों को होने से रोका जा सकता है। 
 
प्रो. सोलंकी ने छाती रोगों के फैलाव को रोकने के लिए फोरम द्वारा चलाए जाने वाले जागरूकता अभियान की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह मानव की सेवा का काम है जिसकी देश को जरूरत है। इसके साथ राज्यपाल ने यह भी कहा कि वे हरियाणा को बिमारी ग्रस्त राज्य नही मानते थे क्योंकि इस राज्य की उपलब्धियां देश ही नही विदेशो मे भी हैं। दूसरे राज्यों के लोग हरियाणावासियों को सशक्त मानते हैं। आमतौर पर कहा जाता है कि ‘देसां में देस हरियाणा, जित दूध दही का खाणा’ तो जहां खान पान अच्छा हो और प्रदेश के खिलाडिय़ों ने अपना लोहा दुनिया में मनवाया हो, उसे सभी सशक्त ही मानेंगे। उन्होंने बताया कि हाल ही में आस्ट्रेलिया के गोल्ड कोस्ट में संपन्न हुए राष्ट्रमंडल खेलों में भारत को मिले कुल 66 पदकों में से 22 पदक हरियाणा के खिलाडिय़ो ने जीते हैं जबकि हरियाणा की आबादी देश की कुल आबादी की मात्र 2 प्रतिशत है। 
 
उन्होंने कहा कि हरियाणा जिस काम को हाथ में लेता है तो उसमें अभूतपूर्व परिणाम मिलते हैं। प्रो. सोलंकी ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा जनवरी 2015 में हरियाणा के पानीपत से शुरू किए गए राष्ट्रव्यापी बेटी बचाओं बेटी पढ़ाओं अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय देश के 100 जिलों में लिंगानुपात गड़बड़ाया हुआ था जिनमें से 16 जिले हरियाणा के थे। उस समय हरियाणा का लिंगानुपात 1000 लडक़ों के विरूद्ध 830 लड़कियों का था जो अब बढक़र 1000 लडक़ों के विरूद्ध 914 का हो गया है और अब यह अनुमान लगाया जा रहा है कि एक साल में यह अनुपात 950 हो जाएगा। प्रो. सोलंकी ने कहा कि इसी प्रकार इंडियन चैस्ट सोसायटी की हरियाणा इकाई इलाज के साथ लोगोंं में जागरूकता लाकर प्रदेश से छाती व क्षयरोगों का सफाया करने में सफल रहेगी। हरियाणा इकाई का गठन हुए अभी मात्र एक वर्ष ही हुआ है। 
 
प्रो. सोलंकी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नया भारत  बनाने के प्रयासों का विस्तार से उल्लेख किया और कहा कि इसमें हरियाणा अव्वल है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री उज्जवला योजना के तहत हरियाणा में 3 लाख परिवारों को मुफ्त एलपीजी कनेक्शन दिए गए। पूरा प्रदेश ओडीएफ हो चुका है तथा हरियाणा डिजीटल क्रान्ति तथा ईज़ आफ डूइंग बिजनेस में देश में नंबर वन है। उन्होंने नीति आयोग का भी जिक्र किया और कहा कि यह नेशनल इंस्टीटयूट ऑफ ट्रांसफोर्मिंग इंडिया का आयोग है। प्रधानमंत्री बार बार कहते हैं कि हमे देश में रिफोर्म नही अपितु परफोर्म करना है ताकि देश ट्रांसफोर्म हो सके। 
 
इससे पहले आयोजन समिति के अध्यक्ष डा. हिमांशु गर्ग, सचिव डा. प्रतिभा डोगरा, साईंटिफिक चेयरमैन सुशील धमीजा, एसोसिएशन ऑॅफ फिजिशियन्स ऑफ इंडिया के सचिव डा. कमल किशोर, आर्टिमिस अस्पताल की प्रबंध निदेशक तथा कार्यक्रम की संरक्षक डा. देबलिना चक्रबर्ती ने भी अपने विचार रखे। डा. गर्ग ने हरियाणा की संस्कृति में प्रचलित हुक्का पीने की ओर इशारा करते हुए कहा था कि इस संस्कृति को बदलने के लिए मुहिम चलानी पड़ेगी, जिसमें सभी के सहयोग की आवश्यकता है। 
 
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 गुरुग्राम, 21 अप्रैल। हरियाणा के राज्यपाल प्रो. कप्तान सिंह सोलंकी ने आज अधिकारियों को जनसेवा का पाठ पढ़ाते हुए कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में हम प्रशासक नही बल्कि जनसेवक है और जनता की इच्छा तथा आकांक्षा को पूरा करना हमारा कत्र्तव्य है। 
 
प्रो. सोलंकी आज गुरुग्राम जिला प्रशासन द्वारा हरियाणा लोक प्रशासन संस्थान(हिपा) में 12वें सिविल सर्विसिज़ डे पर आयोजित कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे। इस कार्यक्रम का शुभारंभ आज प्रात: भारत निर्वाचन आयोग के निर्वाचन आयुक्त अशोक लवासा द्वारा किया गया था। कार्यक्रम में हरियाणा सरकार के पूर्व मुख्य सचिव तथा भारत सरकार में सचिव के पद पर रहे एम सी गुप्ता तथा हिपा के महानिदेशक डा. जी प्रसन्ना कुमार भी उपस्थित थे। 
 
सिविल सर्विसिज डे पर अपना संदेश देते हुए प्रो. सोलंकी ने कहा कि आज का दिन सिविल सेवा के अधिकारियों के लिए आत्ममंथन का दिन है और सभी अधिकारी यह मंथन करें कि किस भावना, नीयत तथा आकांक्षा से हमें जनता के बीच काम करना है। उन्होंने तुलसीदास और महात्मा गांधी के उदाहरण देते हुए कहा कि जब भी कोई व्यक्ति आपके पास काम के लिए आता है तो सोचें कि यह मेरा पहला कत्र्तव्य है कि मुझे इसकी दुख तकलीफ दूर करनी है, आपमें ऐसी भावना होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी कहा करते थे कि अच्छी सरकार वह है जिसमें कम से कम शासन हो और अच्छा गांव वह है जिसमें कोई शिकायत ना करे बल्कि लड़ाई झगड़ों का निपटारा आपस से मिल बैठकर कर लें। उन्होंने कहा कि ऐसा वातावरण पैदा करने के लिए प्रत्येक व्यक्ति की सोच बदलनी पड़ेगी। 
 
राज्यपाल ने कहा कि अधिकारी चार ‘आ’ अर्थात् आस्था, आत्मसंयम, आत्मीयता तथा आध्यात्मिकता को अपनाएंगे तो अवश्य सफल होंगे। उन्होंने बताया कि अधिकारी की संविधान के प्रति आस्था यानि देश के प्रति आस्था हो। हम कोई भी काम करें या योजना बनाएं तो उसमें यह ध्यान रखें कि उसका समाज में अंतिम व्यक्ति पर क्या प्रभाव पड़ेगा, यही संविधान की मूल भावना है। प्रो. सोलंकी ने कहा कि आत्मसंयम का अर्थ है कि आप स्वयं अनुशासन में रहें । उन्होंने कहा कि आप कोई भी कार्य करें यहां तक कि परिवार में रहते हुए भी आत्मसंयम की जरूरत होती है। इसी प्रकार, आप अपने आप को समाज का अंग समझे और समाज के साथ स्वयं का एकाकार करें। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को अपनी इच्छाओं पर नियंत्रण रखना चाहिए क्योंकि इच्छाओं का अंत नही है। यह अध्यात्मिकता है। इसके साथ प्रो. सोलंकी ने डा. भीमराव अंबेडकर का जिक्र करते हुए कहा कि संविधान समिति ने जब संविधान पेश किया था उस समय डा. अंबेडकर ने अपने पहले भाषण में कहा था कि अच्छी चीज को क्रियान्वित करने वाला व्यक्ति यदि अच्छा नही होगा तो उसके परिणाम भी अच्छे नही होंगे। इसके विपरीत यदि बुरी चीज को भी कोई अच्छा व्यक्ति क्रियान्वित करता है तो उसके परिणाम अच्छे आएंगे।
 
आज के इस सिविल सर्विसिज डे के उद्घाटन सत्र में बोलते हुए भारत के निर्वाचन आयुक्त अशोक लवासा ने देश के पहले गृह मंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने सिविल सेवाओं को ‘स्टील फ्रेम’  के समान बताया था । उन्होंने कहा कि आजादी के बाद अब तक देश में काफी उन्नति हुई है, लोगों मे उत्साह बढ़ा है और साथ ही लोगों की उम्मीदें भी ज्यादा हो गई हैं। लोग चतुर और शायद बेईमान भी हो गए हैं। ऐसी स्थिति में लोगों को संभालकर विकास करवाना सिविल सेवा के अधिकारियों की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को ड्यूअल रोल अदा करना होता है, एक तो रेगुलेट करना तथा दूसरा, बदलाव का वातावरण पैदा करना है। यह एक चुनौती भरा कार्य है। श्री लवासा ने कहा कि उनके अनुसार सिविल सर्विसिज़ के इंस्टीटयुशन को समय के साथ अपने आप को बदलना है परंतु तीन मूल मंत्रों को बदला नही जा सकता जिनमें रूटीन कार्य पर फोकस करना, हमें लोगों के प्रति रिस्पांसिव रहना तथा सकारात्मक सोच के साथ हर समस्या का हल ढूढऩा शामिल है। 
 
हरियाणा सरकार के सेवानिवृत मुख्य सचिव 1960 बैच के आईएएस अधिकारी रहे एम सी गुप्ता ने भी अपने अनुभव सांझे किए और कहा कि अधिकारियों को भागवत् गीता तथा भारतीय संविधान की प्रस्तावना को ध्यान में रखकर अपने कत्र्तव्य का निर्वहन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि सिविल सेवा के अधिकारी में तीन गुण- हर कार्य को करने की क्षमता, उच्च अधिकारियों द्वारा किए गए विश्वास व्यक्त पर पूरा उतरना तथा अपने सहयोगियों , वरिष्ठ अधिकारियों व आम जनता को साथ लेकर चलने की क्षमता होनी चाहिए। चौथा गुण जोड़ते हुए उन्होंने कहा कि अधिकारी को बार बार अपने आप को पुन: परिभाषित करते रहना चाहिए। साथ ही श्री गुप्ता ने कहा कि हमें यह पता होना चाहिए कि हमारे से क्या अपेक्षित है, उसी अनुरूप हम अपनी ड्यूटी का निर्वहन करें। 
 
आज के 12वें सिविल सर्विसिज़ डे पर चार योजनाओं- प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, डिजिटल पैमेंट तथा पंडित दीन दयाल उपाध्याय कौशल विकास योजना पर फोकस किया गया था। इन योजनाओं पर कार्यक्रम में प्रैजेंटेशन भी दी गई। इस कार्यक्रम में गुरुग्राम जिला के विभिन्न क्षेत्रों मे सराहनीय करने वाले 21 अधिकारियों को भी सम्मानित किया गया। 
 
कार्यक्रम में उपायुक्त विनय प्रताप सिंह ने आए हुए सभी अतिथियो का धन्यवाद ज्ञापित किया। इस अवसर पर हिपा के महानिदेशक डा. जी प्रसन्ना कुमार ने भी अपने विचार रखे। कार्यक्रम में हिपा के प्रवर निदेशक एम डी सिंहा, डीसीपी मुख्यालय दीपक गहलोत भी उपस्थित थे। 
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